अपोलो हॉस्पिटल्स में मिट्राक्लिप (MitraClip) इम्प्लांट ने हृदय प्रत्यारोपण के लिए 91 दिनों तक इंतजार कर रहे 41 वर्षीय किसान की जान बचायी!

"हृदय प्रत्यारोपण सूची के मरीज़ों को अगर यह चिकित्सा मिलती है तो 5 में से 1 मरीज़ प्रतीक्षा सूची से बाहर भी हो सकते हैं" - डॉ साई सतीश, जिन्होंने भारत में अब तक किए गए सभी मिट्राक्लिप (MitraClip) इम्प्लांट्स में से 70% से अधिक इम्प्लांट्स किए हैं। 

मिट्राक्लिप (MitraClip) प्रक्रियाओं की सहायता से नॉन-सर्जिकल कार्डियक वाल्व रिपेयर्स में अपोलो हॉस्पिटल्स अग्रणी है - महामारी के दौरान भी कई मरीज़ों की जान बचा रहा है ।

राष्ट्रीय, 5 अगस्त, 2021: एशिया के सबसे प्रमुख और सबसे भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवा समूह, अपोलो हॉस्पिटल्स ने एक 41 वर्षीय पुरुष किसान पर मिट्राक्लिप (MitraClip) इम्प्लांट सफलतापूर्वक किए जाने की घोषणा की है। यह मरीज़ तीन महीनों से अधिक समय से हृदय प्रत्यारोपण के लिए विभिन्न अस्पतालों में इंतज़ार कर रहा था। प्रक्रिया के कुछ दिनों के भीतर ही यह व्यक्ति अपने पैरों पर घर वापस गया, और अब शायद उसे हृदय प्रत्यारोपण की भी आवश्यकता नहीं हो सकती।

अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप की कार्यकारी वाइस चेयरपर्सन सुश्री प्रीता रेड्डी ने कहा, "मिट्राक्लिप (MitraClip) प्रक्रिया को करने के लिए मान्यता प्राप्त भारत के कुछ अस्पतालों में से एक होने के नाते, हृदय प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे मरीज़ को बचाने में सक्षम होने से हमें क्षमता मिली है कि हम कई और मरीज़ों की जीने की उम्मीद को पूरा कर सकते हैं। हृदय रोग से पीड़ित रोगियों में गंभीर/अंतिम-चरण के हार्ट फेलियर वाले मरीजों की संख्या 10% तक हैं। शोध से पता चला है कि प्रत्यारोपण के लिए हृदय मिलने तक ह्रदय के समर्थन के लिए, हार्ट फेलियर से मरीज़ को अपनी जान न खोनी पड़े इसलिए मिट्राक्लिप का उपयोग करना सुरक्षित है और इससे मरीज़ में कार्यात्मक सुधार भी हो सकता है जिससे वह प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची से बाहर निकल सकता है। हमें गर्व है कि पिछले तीन महीनों से अधिक समय से प्रतीक्षा सूची में रहे एक 41 वर्षीय पुरुष रोगी के मामले में अपोलो हॉस्पिटल्स ने यह कर दिखाया है। इस मामले की सफलता ने इस अत्याधुनिक और क्रांतिकारी चिकित्सा नवाचार को उन लोगों तक ले जाने की हमारी प्रतिबद्धता को नया बल, नयी आशा प्रदान की  है जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।  इनमें से अधिकांश मामलों में दूसरी लहर के सबसे खराब महीनों के दौरान इम्प्लांट किया गया था और यह केवल कड़े संक्रमण नियंत्रण नियमों के पालन और अस्पताल में कोविड और गैर-कोविड रोगियों को सख्ती से अलग रखने के कारण ही संभव हुआ।”

अंतरराष्ट्रीय मिट्राब्रिज रजिस्ट्री के 119 रोगियों के डेटा से पता चला कि प्रत्यारोपण सूची में शामिल गंभीर रूप से बीमार रोगियों के 87.5% मामलों में प्रक्रियात्मक सफलता हासिल की गई, और 100% केसेस में मरीज़ प्रक्रिया के बाद 30 दिन जीवित थे।

अपोलो हॉस्पिटल्स के सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट, डॉ. साई सतीश ने बताया, “मिट्राक्लिप (MitraClip) एक छोटी धातु की क्लिप है जिसके साथ पॉलिएस्टर फैब्रिक होता है, लीक हुए माइट्रल वाल्व को ठीक करने के लिए इस क्लिप को सही जगह में डाला जाता है जिससे यह सुनिश्चित होता है कि रक्त का प्रवाह सही दिशा में है। हार्ट फेलियर के मरीज़ों के लिए यह विश्व स्तर पर स्वीकृत प्रक्रिया है। मध्यम से गंभीर या गंभीर प्राथमिक और माध्यमिक माइट्रल रेगुर्गिटेशन वाले रोगी, जिनमें चिकित्सा उपचारों से भी सुधार नहीं पा रहे हैं, वह इस न्यूनतम इनवेसिव समाधान का विकल्प चुन सकते हैं, जो उन्हें बेहतर गुणवत्तापूर्ण जीवन और स्वास्थ्य प्रदान करता है।”

डॉ. साई सतीश ने आगे कहा, "इस प्रक्रिया के लिए पात्र मरीज़ों पर हम तीन वर्षों से इसका इस्तेमाल कर रहे हैं और हमने उनकी जीवन की गुणवत्ता में अविश्वसनीय परिणाम देखे हैं। इस क्षेत्र में हमारे अनुभव के बल पर हमने कई महत्वपूर्ण पड़ाव पार किए हैं।  इस साल की शुरुआत में जब महामारी की दूसरी लहर अपनी सबसे ख़राब स्थिति में थी, तब एक ही दिन में चार बहुत ही बीमार रोगियों पर किए गए बैक-टू-बैक मिट्राक्लिप इम्प्लांट्स इसमें शामिल हैं। आज हम इस क्षेत्र में अग्रसर हैं; भारत में अब तक के सभी मिट्राक्लिप इम्प्लांट्स में से 70% अपोलो हॉस्पिटल्स में किए गए हैं। आगे भी और बड़े और अधिक उल्लेखनीय पड़ाव पार करने का विश्वास रखते हुए हम कदम बढ़ा रहे हैं।"

मिट्राक्लिप को भारत में अभी तीन साल पहले लाया गया। पहला मिट्राक्लिप इम्प्लांट 2003 में अमेरिका के एक मरीज पर किया गया था। यह एक क्रांतिकारी प्रक्रिया मानी गयी और व्यावसायिक तौर पर इसे यूरोप में 2008 में और अमेरिका में 2013 में उपलब्ध कराया गया। आज 50 से अधिक देशों में 1,00,000 से अधिक रोगियों पर मिट्राक्लिप प्रक्रिया की गयी है।

जिनकी पारंपरिक ओपन-हार्ट सर्जरी नहीं की जा सकती ऐसे कमज़ोर और बुजुर्ग मरीज़ों के लिए मिट्राक्लिप (MitraClip) इम्प्लांट एक बहुत बड़ा योगदान है। शरीर की कम से कम चीर-फाड़ वाली मिट्राक्लिप प्रक्रिया कार्यात्मक और डिजनरेटिव माइट्रल रेगुर्गिटेशन दोनों में प्रभावी है। यह प्रक्रिया एक कैथ लैब में परक्यूटेनियस रूप से की जाती है और यह डिवाइस हटाने योग्य और पुन: स्थापित करने योग्य होता है। यह दो महत्वपूर्ण गुण इस प्रक्रिया की सुरक्षा में योगदान देते हैं। प्रक्रिया के लिए मरीज़ पात्र है या नहीं इसका सही चुनाव करना इस प्रक्रिया की सुरक्षितता को सुनिश्चित करता है। 

पारंपरिक सर्जरी की तुलना में मिट्राक्लिप प्रक्रिया के बाद बार-बार अस्पताल में भर्ती होने से बचा जाता है, जिससे यह लंबे समय में किफायती हो जाता है और मरीज़ बहुत कम समय में ठीक हो जाते हैं, अपने सामान्य जीवन को फिर से शुरू कर पाते हैं।"

मिट्राक्लिप पर भारत के पहले दो साइंटिफिक पेपर्स अपोलो हॉस्पिटल्स ने प्रकाशित किए हैं, एक पेपर मिट्राक्लिप के पहले केस के बारे में और दूसरा पेपर पहले सात केसेस और एक साल तक के फॉलो-अप और उनमें प्राप्त हुए काफी अच्छे परिणामों के बारे में है। अपोलो हॉस्पिटल्स के डॉ. साई सतीश एकमात्र भारतीय लेखक हैं, जो मिट्राक्लिप इम्प्लांट्स के लिए एपीएसी दिशानिर्देशों के लेखन में शामिल हैं। एशिया का पहला दो दिनों का मिट्राक्लिप प्रशिक्षण कार्यक्रम भी अपोलो अस्पताल में आयोजित किया गया था, जिसमें थ्योरी और चार केसेस शामिल थे। इस कार्यक्रम ने इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में अपोलो हॉस्पिटल्स की स्थिति को और अधिक मज़बूत किया है।



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